एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर क्या है ?

 

एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर क्या है ?




एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) एक ऐसा सॉफ्टवेयर जिसे विशेष उपयोगिताओं के लिए बनाया गया है । एप्लिकेशन प्रोग्राम सामान्य उद्देश्यों के लिए बनाये जाते हैं जैसे की उपज का लेखा-जोखा, सामान्य बिल बुक और खाता-बही बनाना आदि । ये पैकेज बैंकों, अस्पतालों, बीमा कम्पनियों, पब्लिकेशनों आदि के लिए बनाये जाते हैं ।
एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर को भी दो भागों में बाँटा जा सकता है :

  1. विशेष उद्देश्यीय एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर (Customized Application Software) :

    ये वे प्रोग्राम है जो कि उपभोक्ता की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष तौर पर बनाये जाते हैं । इन सॉफ्टवेयर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ये उपभोक्ता की सारी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं । इस प्रकार के सॉफ्टवेयरों की मुख्य हानि यह है कि ये सामान्य उद्देशीय सॉफ्टवेयरों की तुलना महँगा होता है ।

  1. सामान्य उद्दश्यीय एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर (General Purpose Application Software) :

    ये वे प्रोग्राम हैं जो कि लोगों के सामान्य आवश्यक कार्यों को करने के लिए बनाये जाते हैं । प्रत्येक प्रोग्राम इस ढंग से लिखा जाता है कि वह बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर लागू हो । इस सॉफ्टवेयर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सस्ता होता है । लेकिन इसकी एक बड़ी हानि यह है कि ये उपभोक्ताओं की सभी जरूरतों को पूरा नहीं करता ।
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UPS क्या है ?

 

UPS क्या है ?


UPS का पूरा नाम Uninterruptible Power Supply है । यह बैटरी से संचालित उपकरण है जिसके द्वारा कम्प्यूटर में अनवरत विद्युत आपूर्ति बनी रहती है । यह कंप्यूटर को तब पॉवर देता है जब अचानक मुख्य सप्लाई से पॉवर कट जाती है ।

यूपीएस के अन्दर एक बैटरी लगी होती है जो की 20-40 मिनट तक पॉवर दे सकती है । इससे हमें यह लाभ होता है कि जब मुख्य सप्लाई से पॉवर आनी बन्द हो जाती है उस समय हम कंप्यूटर को ढंग से बन्द कर सकते हैं ।
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CPU क्या है ?

 

CPU क्या है ?

CPU का पूरा नाम Central Processing Unit है । इसे प्रोसेसर या माइक्रोप्रोसेसर भी कहता हैं । यह पीसी से जुड़े विभिन्न उपकरणों को नियंत्रित करता है । यह कम्प्यूटर द्वारा प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है । यह एक इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप है जो डेटा को इनफॉर्मेशन में बदलते हुए प्रोसेस करता है । इसे कम्प्यूटर का ब्रेन कहा जाता है । यह कम्प्यूटर सिस्टम के सारे कार्यों को नियंत्रित करता है तथा यह इनपुट को आउटपुट में रूपान्तरित करता है । यह इनपुट तथा आउटपुट यूनिट से मिलकर पूरा कम्प्यूटर सिस्टम बनाता है ।
इसके निम्नलिखित भाग है :-
  • अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) :-
  • इसका उपयोग अंकगणितीय तथा तार्किक गणना में होता है । अंकगणितीय गणना के अन्तगर्त तुलनात्मक गणना के अन्तगर्त जोड़, घटाव, गुणा और भाग इत्यादि तथा तार्किक गणना के अन्तगर्त तुलनात्मक गणना जैसे (<, > या =), हाँ या ना इत्यादि आते हैं ।
  • कंट्रोल यूनिट (Control Unit) :-
  • यह कम्प्यूटर के सारे कार्यों को नियंत्रित करता है तथा कम्प्यूटर के सारे भागों जैसे इनपुट, आउटपुट डिवाइसेज, प्रोसेसर इत्यादि के सारे गतिविधियों के बीच तालमेल बैठाता है ।
  • मेमोरी यूनिट (Memory Unit) :-
  • यह डेटा तथा निर्देशों के संग्रह करने में प्रयुक्त होता है । इसे मुख्यतः दो वर्गों प्राइमरी तथा सेकेंडरी मेमोरी में विभाजित करते हैं । जब कम्प्यूटर कार्यशील रहता है, अर्थात वर्तमान में उपयोग हो रहे डेटा तथा निर्देशों का संग्रह प्राइमरी मेमोरी में होता है । सेकेंडरी मेमोरी का उपयोग बाद में उपयोग होने वाले डेटा तथा निर्देशों को संग्रहित करने में होता है ।
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ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है ?

 

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है ?

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)एक ऐसा प्रोग्राम है जो कम्प्यूटर के हार्डवेयर और उपभोक्ता के बीच माध्यम का काम करता है । ऑपरेटिंग सिस्टम का प्राथमिक लक्ष्य कम्प्यूटर सिस्टम को प्रयोग के लिए सुविधाजनक बनाना है और इसका द्वितीय लक्ष्य कम्प्यूटर हार्डवेयर को सुचारू रूप से चलाना है ।
ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोग्रामों का एक सेट है जो कम्प्यूटर के संसाधनों को प्रबंधित करने के लिए डिजाइन किया गया है और जिसमें कम्प्यूटर को शुरू करना, प्रोग्रामों को मैनेज करना, मेमोरी को मैनेज करना और इनपुट तथा आउटपुट डिवाइसों के बीच के कार्यों का समन्वय करना शामिल है ।
ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार :
  • एकाकी उपभोक्ता ऑपरेटिंग सिस्टम (Single User Operating System) :
  • एकाकी उपभोक्ता ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जो केवल एक उपभोक्ता को एक ही समय में कार्य करने की अनुमति देता है । एम. एस. डॉस सबसे अधिक प्रचलित एकाकी उपभोक्ता ऑपरेटिंग सिस्टम है ।
  • मल्टी-यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम (Multi-User Operating System) :
  • बड़ा कम्प्यूटर अधिक कार्यकुशलता से उपयोग किया जा सकता है, यदि एक ही समय पर बहुत से उपभोक्ता इस पर काम करें । ऐसा लोकल एरिया नेटवर्क के तहत टाइम शेयरिंग मोड़ (Time Sharing Mode) में ही सम्भव है । इन बहु-उपभोक्तओं के साथ ऑपरेटिंग सिस्टम प्रत्येक उपभोक्ता को एक निश्चित समय बाँटता है और इस बात पर भी कड़ी मेहनत करता है कि आउटपुट उपकरणों को जाने वाले नतीजे आपस में मिल न जाए । युनिक्स (Unix), विंडोज 98 आदि कुछ बहु-उपभोक्ता ऑपरेटिंग सिस्टम हैं 
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मेमोरी क्या है ?

 

मेमोरी क्या है ?

मेमोरी कम्प्यूटर का बुनियादी घटक है । यह कम्प्यूटर का आंतरिक भंडारण क्षेत्र है । केन्द्रीय प्रोसेसिंग इकाई (CPU) को प्रोसेस करने के लिए इनपुट डाटा एवं निर्देश चाहिए, जो की मेमोरी में संग्रहित रहता है । मेमोरी में ही संग्रहित तथा निर्देश का प्रोसेस होता है, तथा आउटपुट प्राप्त होता है । अतः मेमोरी कम्प्यूटर का एक आवश्यक अंग है ।
मेमोरी बहुत सारे सेल में बँटे होते है जिन्हें लोकेशन कहते हैं । हर लोकेशन का एक अलग लेबल होता है जिसे एड्रेस कहते हैं ।
मेमोरी दो प्रकार के होते हैं :
  1. प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) :
  2. प्राथमिक मेमोरी को अक्सर मुख्य मेमोरी भी कहते हैं, जो कम्प्यूटर के अन्दर रहता है तथा इसके डेटा और निर्देश का CPU द्वारा तीव्र तथा प्रत्यक्ष उपयोग होता है ।
  3. सहायक मेमोरी (Secondary Memory) :
  4. इसे सहायक तथा बैंकिंग स्टोरेज मेमोरी भी कहते हैं । चँकि मुख्य मेमोरी अस्थाई तथा सीमित क्षमता वाले होते हैं इसलिए द्वितीयक मेमोरी को बड़ी मात्रा में स्थायी डेटा मेमोरी के रूप में इस्तेमाल करते हैं । ज्यादातर इसका उपयोग डेटा बैकअप के लिए किया जाता है । CPU को वर्तमान में जिस डेटा की आवश्यकता नहीं होती है उसे द्वितीयक मेमोरी में संग्रह किया जाता है 
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इन्टरनेट क्या है ?

 

इन्टरनेट क्या है ?


इन्टरनेट का मतलब उच्चस्तरीय कम्प्यूटर का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे से जुड़ाव है । ये जुड़ाव नेटवर्क केबलों, टेलीफोन केबलों, माइक्रोवेव डिश, सैटेलाइट और अन्य प्रकार के आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के द्वारा सम्भव किया जाता है । इन्टरनेट विश्व के विभिन्न नेटवर्कों से सम्बन्ध रखने वालों हजारों कम्प्यूटर का एक जुड़ाव है । इससे नेटवर्किंग के माध्यम से विश्व में किसी भी जगह से विभिन्न प्रकार की सूचनाओं में भागीदारी की जा सकती है ।
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नेटवर्क क्या है ?

 

नेटवर्क क्या है ?

नेटवर्क आपस में एक दूसरे से जुड़े कंप्यूटरों का समूह है जो एक दूसरे से संचार स्थापित करने तथा सूचनाओं, संसाधनों को साझा इस्तेमाल करने में सक्षम होते हैं । किसी भी नेटवर्क को स्थापित करने के लिए प्रेषक, प्राप्तकर्ता, माध्यम तथा प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है । कम्प्यूटर के साधनों में भागीदारी करने के उद्देश्य से बहुत-से कंप्यूटरों का आपस में जुड़ना कम्प्यूटर नेटवर्किंग कहलाता है । कम्प्यूटर नेटवर्किंग की मदद से उपभोक्ता उपकरणों, प्रोग्रामों, संदेशों और सूचनाओं को एक ही जगह पर रहकर उनके साथ भागीदारी कर सकते हैं ।
नेटवर्क स्थापित करने के लिए मुख्य उपकरण निम्नलिखित है :
  • रिपीटर्स (Repeaters)
  • हब (Hub)
  • स्विच (Switches)
  • राउटर्स (Routers)
  • गेटवे (Gateways)
नेटवर्क के निम्नलिखित प्रकार हैं :
  1. लोकल एरिया नेटवर्क (Local Area Network-LAN) :-
  2. यह एक कम्प्यूटर नेटवर्क है, जिसके अन्दर छोटे भौगोलिक क्षेत्र जैसे - घर, ऑफिस, भवनों का एक छोटा समूह या हवाई अड्डा आदि में कम्प्यूटर नेटवर्क है । वर्तमान लैन ईथरनेट तकनीकी पर आधारित है । इस नेटवर्क का आकर छोटा, लेकिन डेटा संचारण की गति तीव्र होती है ।
  3. वाइड एरिया नेटवर्क (Wide Area Network-WAN) :-
  4. इस नेटवर्क में कम्प्यूटर आपस में लीज्ड लाइन या स्विचड सर्किट के द्वारा जुड़े रहते हैं । यह नेटवर्क व्यापक भौगोलिक क्षेत्र देश, महादेश में फैला नेटवर्क का जाल है । इन्टरनेट इसका अच्छा उदाहरण है । भारत में CMC द्वारा विकसित इंडोनेट वैन का उदाहरण है । बैंकों द्वारा प्रदत्त ATM सुविधा वाइड एरिया नेटवर्क का उदाहरण है ।
  5. मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क (Metropolitan Area Network-MAN) :-
  6. MAN दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क को जोड़ता है । यह शहर की सीमाओं के भीतर स्थित कंप्यूटरों का नेटवर्क है । राउटर्स, स्विच और हब्स मिलकर एक MAN का निर्माण करते हैं ।

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नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है ?

 

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है ?

नेटवर्क टोपोलॉजी विभिन्न नोड्स या टर्मिनल को आपस में जोड़ने का तरीका है । यह विभिन्न नोड्स के बीच भौतिक संरचना को दर्शाता है । नेटवर्क संरचना का अर्थ है कि नेटवर्क तारों की तर्कपूर्ण व्यवस्था । अन्य शब्दों में, कम्प्यूटरों का आपस में जुड़ने का ढंग ही नेटवर्क टोपोलॉजी कहलाता है ।
नेटवर्क टोपोलॉजी निम्नलिखित प्रकार के होते हैं :
  • मेस टोपोलॉजी (Mesh Topology) :
  • यह नेटवर्क उच्च ट्राफीक स्थिति में मार्ग (Routes) को ध्यान में रखकर उपयोग किया जाता है । इसमें किसी भी स्त्रोत (Source) से कई मार्गों से सन्देश भेजा जा सकता है । पूर्णतः इन्टरकनेक्टेड मेस नेटवर्क खर्चीला है, क्योंकि इसमें ज्यादा केबल (Cable) तथा नोड में इंटेलिजेंस की आवश्यकता होती है । इस नेटवर्क में उच्च सुरक्षा अनुप्रयोग में डाटा प्रेषित किया जाता है ।
  • स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) :
  • इस नेटवर्क में एक केन्द्रीय नोड होता है जो इंटेलिजेंस से युक्त होता है । बाकि नोड्स इससे जुड़े रहते हैं । इस केन्द्रीय नोड को हब कहते हैं । कोई एक केबल में कोई कठिनाई आने पर एक ही नोड विफल होता है परन्तु अगर हब में कोई कठिनाई आती है तो सारा नेटवर्क विफल होता है ।
  • रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology) :
  • इस नेटवर्क में सभी नोड्स में समान रूप से इंटेलिजेंस होता है । डेटा का प्रवाह हमेशा एक ही दिशा में होता है परन्तु किसी भी एक केबल या नोड में कठिनाई आने पर दूसरे से संचार संभव है ।
  • बस टोपोलॉजी (Bus Topology) :
  • इस नेटवर्क में सभी नोड्स एक ही केवल में जुड़े रहते हैं । कोई भी नोड किसी दूसरे नोड को डेटा प्रेषित करना चाहता है तो उसे देखना होता है की बस में कोई डेटा प्रवाहित तो नहीं हो रहा है । बस खाली रहने पर नोड डेटा प्रेषित कर सकता है । इसमें कम केबल की आवश्यकता होती है तथा नया नोड जोड़ना आसान होता है । परन्तु प्रमुख ट्रांसमिशन लाइन में कठिनाई आने पर सारा नेटवर्क विफल हो जाता है ।
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वेब ब्राऊजर क्या है ?

 

वेब ब्राऊजर क्या है ?


वेब एक विशाल पुस्तक की तरह है तथा वेब ब्राऊजर एक सॉफ्टवेयर है जो कम्प्यूटर को इंटरनेट से जोड़ता है । यह बहुत ही महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर है । ब्राऊजर वर्ड वाइड वेब पर साइट देखने का एक सामान्य साधन है । इन सॉफ्टवेयर का उपयोग कर हमलोग इंटरनेट से जुड़ने में सक्षम होते हैं, तथा वेब से अपने पसंद की जानकारियों को प्राप्त कर सकते हैं । यह अनेक कार्यों को जैसे की ई-मेल, खबरें, इंटरनेट से बात करना, वार्तालाप, मल्टीमीडिया आदि को नियंत्रित करता है ।
ब्राऊजर भी एक वेब ग्राहक माना जाता है क्योंकि क्लाइन्ट मॉडल में यह क्लाइन्ट प्रोग्राम की तरह कार्य करता है । ब्राउजर वेब सर्वर से सम्पर्क बनाता है और सूचनाओं के लिए निवेदन करता है ।
वेब ब्राऊजर का उपयोग कर हमलोग किसी विशेष पेज या लोकेशन पर उसके पता टाइप कर जा सकते हैं, इस पता को यूआरएल कहते हैं ।
कुछ प्रमुख वेब ब्राऊजर निम्नलिखित है :-

  • नेटस्केप नेविगेटर (Netscape Navigator)
  • माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सपलोरर (Microsoft Internet Explorer)
  • मौजिला फायरफॉक्स (Mosilla Firefox)
  • NCSA मॉजैक (NCSA Mosaic)
  • ओपेरा (Opera)
  • सफारी (Safari)
  • क्रोम (Chrome)

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बिहार अपना खाता । बिहार भूमि, भूलेख नक्शा, जमाबंदी, खसरा, खतौनी ऑनलाइन निकालें || बिहार राजस्व और भुमि सुधार विभाग|| Sahil2107||Webtech||

 बिहार राजस्व और भुमि सुधार विभाग ने 
 Bihar Bhulekh के लिए एक वेब पोर्टल लांच कर दिया है। साथ ही आप इस साइट की मदद से भू-नक्शा, अपना खाता और जमाबंदी नकल का प्रिंट भी निकाल सकते हैं। ।
बिहार सरकार ने लोगों की परेशानी को दूर करने के लिए ही यह ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस वेबसाइट की वजह से न केवल तहसील जाने से बचेंगे बल्कि तहसील से बेवजह की भीड़़ भी छट जाएगी। इस साइट पर जा कर आपको चुटकियों में अपना खाता, खसरा-खतौनी नकल, भूलेख, भू नक्शा देख सकते हैं। साइट पर बिहार भूलेख नक्शे की सभी जानकारियां अपडेट कर दी गई हैं। बिहार राजस्व और भूमि सुधार विभाग की इस पहल के चलते अब सभी लोग आसानी से घऱ बैठ कर भी  जमीन से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर हासिल कर पाएंगे। चलिए जानते हैं कैसे Bihar Land Record पोर्टल करता है काम

  • Apna Khata Bihar | बिहार अपना खतौनी  ऑनलाइन निकालें

  • सबसे पहले आपको इसके आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा, जिसका लिंक है यह http://lrc.bih.nic.in/


  • जैसे ही आप ऊपर दिए गए लिंक को चुनेंगे आप इसकी आधिकारिक साइट पर पहुंच जाएंगे। वेबसाइट पर जाने के बाद आपको अपना खाता देखें इस विक्लप पर जाना है।
  • “अपना खाता देखें” लिंक पर क्लिक करते ही नया पेज खुलेगा जिसमें मांगी गई जानकारी देनी होगी | आपको अपना जिला, अनुमंडल, अंचल चुनना होगा

  • आप निम्नलिखित तरीको से अपना खाता देख पाओगे। इसमें आपको पहला विक्लप मिलेगा जिसमें आप “मौजा के समस्त खातों को नामानुसार देखें”, दूसरे विक्लप में “मौजा के समस्त खातों को खेसरा संख्या के अनुसार देखें”, तीसरे विकल्प में “खाता संख्या से देखें”, चौथे विकल्प में आप “खेसरा संख्या से देखें” और पांचवे विक्लप में आप “खाताधारी के नाम से देखें”
  • यदि आप “मौजा के समस्त खातों को नामानुसार” अपना खाता देखना चाहते है। तो आपको अपने मौजा नाम के पहले अक्षर को चुनना होगा। जो आपको ऊपर दिए गए बॉक्स में दर्शाए गए है। जिसके बाद, उस अक्षर से मिलते हुए सभी मौजा खातों का नाम दिखाई दे जाएगा। जिसमें आपको अपने मौजा खाते का नाम चुनना होगा। जिसके बाद, नीचे एक सूची खुलेगी। यहाँ आपको रैयतधारी का नाम, पिता/पति का नाम, खाता संख्या और खेसरा संख्या की अनुसार अपना खाता देख सकते है।

बिहार भूलेख नकल खसरा-खतौनी ऑनलाइन देखें | Bihar Bhulekh, Khasra, Khatauni, Jamabandi Nakal Online

  • यदि आप ऑनलाइन दाखिल खारिज एवं अपनी जमाबंदी देखना चाहते हो। तो इस लिंक http://biharbhumi.bihar.gov.in/ पर क्लिक करें।
  • वेबसाइट खुलने पर आपको जमाबंदी पंजी देखें लिंक पर क्लिक करना है

  • इसके बाद, आपको अपने जिले और सर्कल को चुनना होगा। इसे चुनने के बाद आप सर्च बटन पर क्लिक करें।
  • इसके बाद आप खतियान और जमाबंदी विकल्प का चुने
  • अंत में “रजिस्टर” बटन में क्लिक करके “बिहार भूलेख खसरा-खतौनी नकल” देखें।

बिहार भू-नक्शा | Bihar Bhu Naksha (Plot Map) View Online

  • बिहार भू नक्शा ऑनलाइन देखने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
  • अब आपको अपना जिला, सब डिवीज़न, सर्किल, मौजा, टाइप और शीट का चुनाव करना होगा


  • इसके बाद आपको नक़्शे में अपनी खसरा संख्या पर क्लिक करना होगा
  • खसरा नंबर पर क्लिक करते ही मालिक की जानकारी दिखाई देगी । इसी जानकारी के नीचे अंत में “Map Report” और “ROR Report” दिखाई देंगे
  • नक्शा देखने के लिए “Map Report” लिंक पर क्लिक करें, ऐसा करने पर नक्शा ऑनलाइन खुल जायेगा|

  • आप चाहें तो ये रिपोर्ट PDF फाइल के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं
Bihar Apna Khata Helpline
कार्यालय का पता- प्रमुख सचिव, राजस्व और भूमि सुधार विभाग, पुराना सचिवालय, बेली रोड, (800-005) पटना
टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर  1800-345-6215
आधिकारिक ईमेल आईडी –  revenuebihar@gmail.com

  • बिहार राजस्व विभाग नागरिकों को क्या क्या ऑनलाइन सुविधाएं देता है?

राजस्व विभाग बिहार के पोर्टलों पर आप अपना खाता, भूलेख, भू नक्शा, जमाबंदी नक़ल इत्यादि ऑनलाइन देख सकते हैं|

  • ऑनलाइन जानकारी निकालने के लिए क्या इनफार्मेशन देनी होगी?

खसरा नंबर, मौजा इत्यादि |

  • क्या बिहार का कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन ही जमीनी रिकॉर्ड देख सकता है?

जी हाँ! बस आपको दी गई जानकारी को फॉलो करना होगा|
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